Goa @ आईएफएफआई का 52वां संस्करण आज से: अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में खेलभावना को प्रोत्साहित करने वाली 4 स्पेशल फिल्में शामिल
गोवा में आज से 28 नवंबर तक चलने वाला भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) इस बार कुछ खास होगा। फिल्म महोत्सव के 52वें संस्करण के खेल खंड में खेल भावना को बेहतरीन ढंग से दिखाते वाली खेल से संबंधित चार प्रेरणादायक फिल्में इसमें दिखाई जाएंगी।
नई दिल्ली, एजेंसी।
गोवा में आज से 28 नवंबर तक चलने वाला भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) इस बार कुछ खास होगा। फिल्म महोत्सव के 52वें संस्करण के खेल खंड में खेल भावना को बेहतरीन ढंग से दिखाते वाली खेल से संबंधित चार प्रेरणादायक फिल्में इसमें दिखाई जाएंगी। ऐसे समय में जब खेल प्रतियोगिताओं को लेकर विश्व स्तर पर बड़े पैमाने पर जश्न मनाया जा रहा है, खेल पर आधारित फिल्मों ने सच्चे धैर्य, दृढ़ संकल्प, उत्साह और सौहार्द के चित्रण के कारण हमेशा सिनेप्रेमियों को आकर्षित किया है। इसके अलावा, भारत ने इस वर्ष ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में कई पदक जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है जिससे यह भारतीय खेलों के लिए सर्वश्रेष्ठ वर्ष बन गया है। पर्दे पर खेलों की महिमा का जश्न मनाने के लिए यह आईएफएफआई सिनेमा प्रेमियों के लिए खेलों पर आधारित चार अंतरराष्ट्रीय फिल्में ला रहा है। इस खंड में प्रस्तुत की जा रही फिल्में हैं- लिवेन वैन बाएलेन द्वारा निर्देशित रूकी (डच), जेरो यून द्वारा निर्देशित फाइटर (कोरियाई), मैसीज बार्ज़ेवस्की द्वारा निर्देशित द चैंपियन ऑफ ऑशविट्ज़ (जर्मन, पोलिश) और एली ग्रेप द्वारा निर्देशित ओल्गा (फ्रेंच, रूसी, यूक्रेनी) है।
ओल्गा
एक युवा जिमनास्ट की रोचक कहानी पर आधारित फिल्म ‘ओल्गा’ निर्देशक एली ग्रेप द्वारा निर्देशित एक बहुभाषी फिल्म है। स्विट्जरलैंड में निर्वासित, एक प्रतिभाशाली और जुनूनी यूक्रेनी जिमनास्ट ओल्गा राष्ट्रीय खेल केंद्र में अपनी जगह बनाने की कोशिश करती है। हालांकि यह युवा लड़की अपने नए देश के माहौल के अनुकूल ढल जाती है और यूरोपीय चैंपियनशिप की तैयारी करती है, तभी यूक्रेनी क्रांति उसके जीवन को प्रभावित करती है और उसका जीवन बिखर जाता है।

फिल्म- रूकी
इस फिल्म में दोस्ती, प्रतिद्वंद्विता और प्रतिस्पर्धा का एक ऐसा मिश्रण है जो आपके दिल की धड़कन को बढ़ा देगा। जीवन और जीवन में मिले दूसरे अवसरों के बारे में बताने वाली डच फीचर फिल्म ‘‘रूकी’’ का निर्देशन लिवेन वैन बाएलेन ने किया है। फिल्म में निकी नामक व्यक्ति की कहानी बताई गई है, जो एक युवा, महत्वाकांक्षी और आत्मविश्वास से भरा बाइकर है, जो रेसिंग के दौरान हमेशा अपनी जान की बाजी लगा देता है। खेल के लिए उसका साहसिक जुनून अंततः उसे एक दुर्घटना में डाल देता है, जिससे उसकी दुनिया चरमरा जाती है। फिल्म हमें दिखाती है कि कैसे निकी अपने भतीजे को कोचिंग देकर उसके बाइक रेस के लिए तैयार करता है और अपने सपने को पूरा करता है।

फाइटर
जेरो यून द्वारा निर्देशित कोरियाई फिल्म ‘‘फाइटर’’ एक उत्तर कोरियाई शरणार्थी जीना के बारे में है जो बेहतर जीवन की तलाश में सियोल आती है। उसे अपने पिता को दक्षिण कोरिया लाने के लिए पैसों की जरूरत होती है। उसने इसके लिए बहुत कड़ी मेहनत भी की लेकिन दोनों कोरिया के बीच तनाव और उसके बाद होने वाले भेदभाव ने उसके राह को बाधित कर दिया, जिससे वह पर्याप्त पैसा नहीं जुटा सकी। तभी वह बॉक्सिंग जिम की सफाई के काम की बदौलत मुक्केबाजी की दुनिया में कदम रखती है। युवा और आत्मविश्वास से भरी महिला मुक्केबाजों को देखकर जीना प्रेरित महसूस करती हैं। आगे क्या होता है यह निश्चित रूप से फिल्म समारोह के दर्शकों को प्रेरणा प्रदान करेगा।
द चैंपियन ऑफ ऑशविट्ज़
यह फिल्म द्वितीय विश्व युद्ध की घटनाओं से ली गई दृढ़ता और अस्तित्व की एक असाधारण वास्तविक जीवन की कहानी को प्रस्तुत करती है। मैसीज़ बार्ज़ेवस्की द्वारा निर्देशित द चैंपियन ऑफ ऑशविट्ज़ एक मुक्केबाज और बंदी शिविर ऑशविट्ज़-बिरकेनाउ के कैदियों में से एक, टेड्यूज़ 'टेडी' पिएत्र्ज़िकोव्स्की की भूली हुई कहानी को सामने लाती है। बंदी शिविर में अपने तीन साल के प्रवास के दौरान 'टेडी' नाजी आतंक पर जीत की आशा का प्रतीक बन गया। ऑशविट्ज़ के पूर्व कैदियों के अभिलेखीय बयानों और स्वयं मुक्केबाज़ की यादों के आधार पर उनके ऑन-स्क्रीन इतिहास को विस्तार से प्रलेखित किया गया है। सिने प्रेमी अब 52वें आईएफएफआई में उनके सफर का अनुभव कर पाएंगे।
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