विधानसभा में गूंजा बरलूट प्रकरण: ​राजस्थान विधानसभा में सीएम के सलाहकार संयम लोढ़ा से नाराज हुए स्पीकर, स्पीकर ने बुलाए मार्शल

राजस्थान विधानसभा में नारेबाजी, विधायकों ने कहा पुलिस की गुंडागर्दी नहीं चलेगी, सीएम सलाहकार संयम लोढ़ा के खिलाफ स्पीकर सीपी जोशी ने मार्शल बुलाए। बरलूट पुलिस थाने में बुजुर्ग महिला की हत्या के मामले में निर्दोष को फंसाने का मामला।

​राजस्थान विधानसभा में सीएम के सलाहकार संयम लोढ़ा से नाराज हुए स्पीकर, स्पीकर ने बुलाए मार्शल

जयपुर। 
विधानसभा में सीएम के सलाहकार व सिरोही विधायक के खिलाफ आज स्पीकर को मार्शल बुलाने पड़ गए। हालात यह हो गए कि एक ओर सदन में नारेबाजी होना शुरू हो गई, तो दूसरी ओर विधानसभा अध्यक्ष नाराज होकर मार्शल को बुलाकर बाहर करने तक का आदेश दे दिया। हालांकि मामला जल्द ही शांत हो गया।


दरअसल, सिरोही के पुलिस थाना बरलूट इलाके में बुजुर्ग की हत्या मामले में एक निर्दोष व्यक्ति को फंसाने के मामले में सीएम के सलाहकार संयम लोढ़ा ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री शांती कुमार धारीवाल ने इस प्रकरण में 7 दिन के दौरान जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। लेकिन संयम लोढ़ा इससे सहमत नहीं दिखें और बीच में ही बोलने के लिए खड़े हो गए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी ने धारीवाल के बयान को सही ठहराते हुए लोढ़ा को आसन ग्रहण करने का आदेश दिया। लेकिन इसके बाद भी लोढ़ा पीड़ित को मुआवजा व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे तो स्पीकर जोशी नाराज हो गए। उन्होंने लोढ़ा को बैठने के निर्देश दिए, नहीं बैठने पर मार्शल को बुलाते हुए संयम लोढ़ा को बाहर करने तक के आदेश दे दिए। 
धारीवाल ने दिया बयान—7 दिन में होगी जांच
संसदीय कार्य मंत्री शांती कुमार धारीवाल ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि सिरोही जिले के बरलूट में हत्या के मामले में एक नागरिक की गिरफ्तारी के प्रकरण में सात दिन के भीतर जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
धारीवाल शून्यकाल में गृहमंत्री की ओर से सदस्य संयम लोढा के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे।
धारीवाल ने सदन में कहा कि सरकार की मंशा है कि किसी भी निर्दोष को सजा नहीं मिले। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देशानुसार एटीएस व एसओजी ने जांच कर नागरिक ​लिखमाराम को हत्या की वारदात में शामिल होना नहीें पाया गया है। 
वर्तमान में प्रकरण में थानाधिकारी व अनुसंधान अधिकारी के विरूद्ध जांच जारी है। सरकार जानना चाहती है कि लिखमाराम को क्यों और किस दुर्भावनावश गिरफ्तार किया गया। 
धारीवाल ने सदन मे घोषणा की कि प्रकरण में सात दिन के भीतर जांच की जाएगी और पुलिस अधिकारियों के दोषी पाए जाने पर उनके विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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