Book Launching: इतिहास का जातीय विकृतिकरण आने वाली नस्लों के लिए भारी पड़ेगा

 — नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में 'गुर्जर देश इतिहास और मिथकों में घमासान' पुस्तक का विमोचन...

इतिहास का जातीय विकृतिकरण आने वाली नस्लों के लिए भारी पड़ेगा
Book Launching at Constitution Club Delhi

 — नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में 'गुर्जर देश इतिहास और मिथकों में घमासान' पुस्तक का विमोचन...

नई दिल्ली | नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में गुरुवार को 'गुर्जर देश इतिहास और मिथकों में घमासान' पुस्तक का विमोचन किया गया। क्षत्रिय इतिहास संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक  तनसिंह की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं प्रार्थना के साथ हुआ।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए फ्रांस सरकार से 'नाइट आफ द आर्डर आफ अकेडमिक पॉम्स' सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. राजेन्द्रसिंह खंगारोत ने कहा कि - इतिहास में सिर्फ तथ्य होते हैं। परन्तु दुर्भाग्य है कि आज इतिहास संकल्पनाओं पर और मिथकों पर लिखा जा रहा है। उन्होंने इस पुस्तक में लिए गए संदर्भों और तथ्यों की तारीफ करते हुए इसे एक अनूठी कृति बताया।

प्रो० खंगारोत ने कहा कि इतिहास का विकृतिकरण करके उसके किंचित फायदे लोग उठाने की कोशिश करते हैं, लेकिन तमाम मानवता उसके दीर्घकालीन नुकसान उठाती है। रक्षक इण्डस्ट्री चैम्बर एवं एग्री एसोसिएशन के निदेशक, धरोहर संरक्षण एवं इतिहास संकलन केन्द्र के राष्ट्रीय संयोजक जितेन्द्र नारायण सिंह ने युवा लेखक के प्रयास की सराहना करते हुए अन्य से भी पुस्तक लेखन में आगे बढ़ने का आह्वान किया। 

क्षत्रिय इतिहास संस्थान के निदेशक सेवानिवृत्त कर्नल पूरण सिंह राठौड़ ने कहा कि क्षत्रिय इतिहास को विकृत करने की परम्परा बाह्य तत्वों से शुरू हुई और अनवरत जारी है। यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। श्री राठौड़ ने कई तथ्यात्मक उदाहरणों के माध्यम से इतिहास विकृतिकरण के लिए परदे के पीछे कार्य कर रही असामाजिक शक्तियों को जिम्मेदार ठहराया।

ज्ञानप्रभा प्रकाशन से प्रकाशित इस पुस्तक के लेखक वीरेन्द्रसिंह राठौड़ ने पुस्तक लेखन में उपयोग की गई वैज्ञानिक विधियों और उसके सारतत्व पर प्रकाश डाला। वीरेन्द्रसिंह जी ने कहा कि गुर्जर देश किसी जाति से नहीं अपितु स्थान से संदर्भित है। इसका ऐतिहासिक उपयोग उसी रूप में किया गया है व किया जाना चाहिए।

वरिष्ठ इतिहासकार भगवान सिंह परमार ने कहा कि इतिहास का यह विकृतिकरण आने वाली पीढ़ियों को भारी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पुस्तक के लेखक ने एक सार्थक कोशिश की है और ऐसी ही परम्पराओं का अनवरत जारी रहना जरूरी है। इतिहास वैज्ञानिक कसौटी पर कसे हुए तथ्यों से वर्णित होता है।

इतिहास को सिर्फ किसी राजनीतिक या जातीय नजरिए से देखना ठीक नहीं है। श्री परमार ने कई उदाहरणों के माध्यम से कहा कि भारत का इतिहास कई जगह दबा हुआ है, जिस तरह कौटिल्य का अर्थशास्त्र कहीं छिपा हुआ मिल गया। उसी तरह शोधार्थी लगे रहे तो समय-समय पर दबा हुआ गूढ़ ज्ञान बाहर आता रहेगा।     

इस मौके पर ऐतिहासिक चरित्र महाराणा प्रताप के सेनापति राणा पूंजा सोलंकी के वंशज भंवर परीक्षितसिंह पानरवा ने बताया कि किस तरह इतिहास विकृतिकरण करने वाले संगठनों ने गैर जिम्मेदाराना रूप से सभी ऐतिहासिक प्रमाणों के उपलब्ध होने के बावजूद पानरवा के राणा पूंजा को भील जाति का होना प्रचारित किया।

हैरत की बात है कि न केवल राजनेताओं ने बल्कि सांस्कृतिक कहे जाने वाले संगठनों ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई। इस कारण से एकता का प्रतीक रहे मेवाड़ का सामाजिक सौहार्द खत्म होता जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप सिंह बीदावत ने किया। क्षत्रिय इतिहास संस्थान की ओर से वीर बहादुर सिंह असाडा ने आभार जताया। कार्यक्रम का समापन श्री क्षत्रिय युवक संघ के दिल्ली NCR प्रान्त प्रमुख रेवंतसिंह धीरा ने गीता के मंत्र के साथ किया। 

◾पुस्तक के बारे में...

यह पुस्तक गुर्जर शब्द से जुड़े इतिहास पर है। पिछले कुछ दशकों से इस शब्द के मायनों पर बहुत कुछ कहा लिखा गया है। पर उसमें तथ्यों से कहीं अधिक मिथकों का समावेश है। परिणाम स्वरूप हमारी मुख्यधारा में उत्तर भारत के आधा दर्जन क्षत्रिय वंशों व उनके महापुरुषों की उत्पत्ति को लेकर गलत दावों का प्रसार चिंताजनक स्तर तक जा पहुँचा है।

मध्यकाल और वर्तमान के बीच गुर्जर शब्द से जुड़े पहचान के समीकरणों का गणित आज समाज और सरकार के लिए एक ज्वलंत समसामयिक विषय बन गया है। उस पर राजनैतिक उद्देश्यों का दंश, जो कि सदियों से सौहार्द में रहती विभिन्न जातियों के मानस में ध्रुवीकरण का विष वमन कर रहा है। ऐसे में पुस्तक के द्वारा इन सभी दावों का परीक्षण कर सत्य स्थापित करने का प्रयत्न है। पुस्तक का प्रारूप इस प्रकार है कि इन सभी दावों को एक-एक कर पाठकों के समक्ष रखा जाए और साथ ही उनका विश्लेषण कर निष्कर्ष तक पहुँचा जाए। 

इस प्रक्रिया में तथ्यों व तर्कों के प्रयोग करते समय ऐतिहासिक शोध के मानकों की पालना का पूरा प्रयास किया गया है। अंतिम अध्याय में गुर्जर शब्द की ही तरह ऐतिहासिक पहचान से जुड़ाव को लेकर जन्में कुछ अन्य बहस युक्तविषयों पर संक्षेप में आंकलन प्रस्तुत किया गया है। लक्ष्य है कि इस अँधेरी रस्साकशी की ऊहापोह में सत्य का पुंज ऊँचाई पर रोप दिया जाए।

तथ्यों का प्रकाश इतिहासकारों के गलियारों तक सीमित ना रहकर समाज की जड़ों तक झर जाने का सुफल ये होगा कि देश में सामाजिक टकराव के तूफान खड़े नही होंगे। इससे आज और आने वाले कल के कई प्रपंचों का समाधान होगा। उस ओर यदि ये पुस्तक एक कदम भी ले जा सके तो ये प्रयास सार्थक होगा।

◾लेखक के बारे में...

आईटी प्रोफेशनल वीरेन्द्रसिंह ने एक पुस्तक पृथ्वीराज चौहान ए लाइट आन द मिस्ट इन हिस्ट्री पहले लिखी है। वे कई इतिहास के साथ—साथ ज्योतिष और शस्त्र अधिकार आदि विषयों पर भी पकड़ रखते हैं। वे इतिहास संबंधी विषयों को लेकर लगातार विभिन्न मंचों पर अपनी सार्थक उपस्थिति रखते हैं।

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