खेल: शतरंज के तपस्वी जैसा जीवन जी रहे हैं प्रज्ञानंदा

शतरंज के तपस्वी जैसा जीवन जी रहे हैं प्रज्ञानंदा
वेंकटचारी जगन्नाथन

चेन्नई, 23 अगस्त (आईएएनएस)

भारत की 17 वर्षीय शतरंज प्रतिभा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंदा शतरंज के तपस्वी जैसा जीवन जी रहे हैं। उनके पिता रमेशबाबू ने बेहद विनम्र अंदाज में कहा कि प्रज्ञानंदा का विश्व शतरंज चैंपियन मैग्नस कार्लसन के खिलाफ पांच जीत, दो ड्रा और एक हार का रिकॉर्ड है।

प्रज्ञानंदा ने सोमवार को शतरंज की बिसात पर तूफान ला दिया जब उन्होंने कार्लसन को एफटीएक्स क्रिप्टो कप में हरा दिया। चैंपियन चैस टूर के दूसरे सबसे बड़े मेजर में मजबूत फील्ड के बीच वह उपविजेता बनकर उभरे।

उनकी माता आर नागालक्ष्मी ने आईएएनएस से कहा, युवा ग्रैंडमास्टर और उनकी बड़ी बहन महिला ग्रैंडमास्टर आर वैशाली तपस्वियों जैसा जीवन जी रहे हैं। वह केवल शतरंज के बारे में बात करते हैं और उसी में जीते हैं जबकि अन्य बातों से दूर रहते हैं।

12वीं क्लास के छात्र के लिए यह महीना यादगार रहा है। इस महीने के शुरू में उनकी टीम इंडिया 2 ने मामल्लापुरम में 44वें शतरंज ओलम्पियाड में कांस्य पदक जीता था और प्रज्ञानंदा को उनके निजी प्रदर्शन के लिए कांस्य पदक मिला था।

10 अगस्त को प्रज्ञानंदा ने अपना जन्मदिन मनाया और इसके बाद कार्लसन पर जीत हासिल की और एफटीएक्स क्रिप्टो कप में उपविजेता बने।

नागालक्ष्मी ने कहा, वह अब दुबई ओपन में हिस्सा लेंगे और उसके बाद घर लौटेंगे।

अपने माथे पर भभूत लगाए प्रज्ञानंदा अपनी पहली चाल चलने से पहले ईश्वर की प्रार्थना करते हैं।

नागालक्ष्मी ने कहा, प्रज्ञा का कोई पसंदीदा हिन्दू देवता नहीं है। वह पहली चाल चलने से पहले प्रार्थना करते हैं।

प्रज्ञा और विशाल रोजाना पांच-छह घंटे शतरंज का अभ्यास करते हैं और ऑनलाइन शतरंज क्लास में भी हिस्सा लेते हैं। उनकी फिल्मों या टीवी शो में कोई दिलचस्पी नहीं है।

नागालक्ष्मी ने कहा, प्रज्ञा और वैशाली टीवी केवल तभी देखते हैं जब वे खाना खाते हैं। उनकी कोई पसंदीदा डिश या मूवी एक्टर नहीं है। वे घर का बना खाना खाते हैं। वे ऑनलाइन पिज्जा या नूडल्स आर्डर नहीं करते। वे पोषक खाना खाने के प्रति सावधान रहते हैं।

भाई-बहन घर में शतरंज खेलते हैं और अन्य खेलों के बारे में चर्चा करते हैं।

प्रज्ञानंदा 2661 ईएलओ रेटिंग के साथ विश्व जूनियर्स रेटिंग में आठवें स्थान पर हैं। उन्हें टेबल टेनिस, बैडमिंटन पसंद है और वह रोमांचक क्रिकेट मैचों के मुख्य अंश देखना ही पसंद करता है।

प्रज्ञा का शतरंज सफर तब शुरू हुआ था जब वैशाली को शतरंज कोचिंग स्कूल में डाला गया था। प्रज्ञा 64 खानों के इस खेल की तरफ आकर्षित हो गया।

उसने घर पर इसे खेलना शुरू कर दिया और प्रतियोगिताएं जीतने लगा।

प्रज्ञा को खेल की बारीकियां सिखाने वाले ग्रैंड मास्टर आर बी रमेश ने कहा, प्रज्ञा की शैली को यूनिवर्सल कहा जा सकता है जो न ज्यादा आक्रामक है ना ज्यादा रक्षात्मक। वह सही समय पर सही चाल चलता है।

रमेश के अनुसार प्रज्ञा ज्यादा भावुक नहीं है और चीजों को वैसे लेता है जैसे वे आती हैं।

नागालक्षमी ने कहा, उसने कल (सोमवार) कार्लसन को हरा दिया है लेकिन उसका सारा ध्यान दुबई ओपन में बेहतर प्रदर्शन करने पर लगा होगा। लोकप्रियता और प्रसिद्धि उसके दिमाग में नहीं चढ़ती है।

--आईएएनएस

आरआर

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