वाह रे राजनीति...: तीन साल में दो बार एपीओ रहे आशुतोष को सबसे धनी पालिका माउंट आबू की कमान, कार्यभार संभालने के 24 घंटों में देवल को हटाया

राजस्थान की सबसे धनी नगरपालिका माउंट आबू की मलाईदार पोस्टिंग पर प्रदेश की राजनीतिक नजरें हमेशा से रही है। इस बार भी अछूती नहीं है।

तीन साल में दो बार एपीओ रहे आशुतोष को सबसे धनी पालिका माउंट आबू की कमान, कार्यभार संभालने के 24 घंटों में देवल को हटाया

जयपुर | राजस्थान की सबसे धनी नगरपालिका माउंट आबू की मलाईदार पोस्टिंग पर प्रदेश की राजनीतिक नजरें हमेशा से रही है। इस बार भी अछूती नहीं है। यहां लगाए गए आयुक्त संजय देवल को कार्यभार ग्रहण करने के चौबीस घंटों के भीतर हटा दिया गया है। उनकी जगह आशुतोष आचार्य को पोस्टिंग दी गई है। आदेश आने के बाद आचार्य ने कोई और पहुंच जाए इसे ध्यान में रखते हुए तुरत—फुरत कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है। जो कार्मिक और हितैषी चौबीस घंटे पहले देवल की मिजाज पुरसी में जुटे थे वे ही आचार्य के स्वागत में करबद्ध नजर आए।

प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी माउंट आबू सभी के जेहन में रहता है। ऐसे में देवल की विदाई चौबीस घंटे में क्यों हुई। माउंट आबू के निवासी सरकार के इस आदेश के पीछे छुपी कोई खास वजह नहीं ढूंढ नहीं पाए हैं। देवल को इस तरह से हटाया जाना आबू की गलियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में गहलोत—पायलट गुट के बीच की अदावत की गाज देवल पर गिरी है। देवल के पिता पूर्व आईएएस और विधायक रहे सीडी देवल अपने जमाने में प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं और पड़ोसी जिले पाली में उनकी आज भी धाक है। इन दिनों पायलट गुट से नजदीकियों के चलते गहलोत गुट की तिरछी नजरों ने माउंट आबू में पोस्टिंग के चौबीस घंटे के भीतर उनकी रवानगी के आदेश थमा दिए हैं। देवल ने पाली के पूर्व सांसद बद्री जाखड़ और सीएम अशोक गहलोत को लेकर कई तरह की टिप्पणियां भी पिछली सरकार के वक्त की थी। इसके बाद देवल गहलोत गुट की ओर से हाशिए पर धकेले जाते रहे, लेकिन वे पाली की राजनीति में अप्रासांगिक कभी नहीं हुए। गहलोत गुट से अदावती के चलते देवल का झुकाव तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट की ओर हुआ। केवलचंद गुलेच्छा एंड टीम को किनारे करते हुए पाली में वे अपने शिष्य चुन्नीलाल चाड़वास को अध्यक्ष बना लाए। चाड़वास ने पायलट को हटाए जाने पर अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर खुलेआम बगावती तेवर भी दिखाए थे।

पाली नगर परिषद में पार्षदों से अनबन और पिछले तीन साल से अपनी कार्यशैली काे लेकर विवादाें में रहे आयुक्त आशुतोष आचार्य तीन साल के कार्यकाल में दो बार एपीओ भी हुए थे। आशुतोष आचार्य पूर्व में सादड़ी नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी के पद पर रहते हुए एलईडी घोटाले काे लेकर भी विवादों में रह चुके हैं। देखना है कि बदलते वक्त में वे प्रदेश के इस महत्वपूर्ण पर्वतीय कस्बे पर क्या रौनक बिखेरते हैं।

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